भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई से पहले सत्तारूढ़ लिकुड पार्टी के सांसदों ने इजराइल के राष्ट्रपति बेंजामिन नेतान्याहू का समर्थन किया है। लिकुड के मंत्री और सांसद आमिर ओहाना, जाची हंगेबी और मिरी रेगेव राष्ट्रपति के समर्थन में आए हैं।
इन सांसदों ने कहा कि नेतान्याहू पर लगे आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। वे सुनवाई के दौरान प्रधानमंत्रीके साथ कोर्ट भी जाएंगे। नेतान्याहू पर धोखाधड़ी, रिश्वत लेने और विश्वासघात के आरोप हैं। इन मामलों में आज सुनवाई होगी।
नेतान्याहू के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा 17 मार्च को शुरू हुआ था। हालांकि, इसके बाद भी इजराइल की सुप्रीम कोर्ट ने 7 मई को उन्हें सरकार बनाने की इजाजत दे दी थी। कोर्ट ने उन्हें अयोग्य घोषित करने की मांग करने वाली याचिका भी खारिज कर दी थी।
विपक्ष ने नेतान्याहू को मंत्रियों के समर्थन पर आपत्ति जताई
विपक्ष के नेता याइर लैपिड ने मंत्रियों के नेतन्याहू को समर्थन देने पर आपत्ति जताई। लैपिड ने कहा कि यह देश के लिए अपमान की बात है। उन्होंने कहा ओहाना देश के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री हैं। इसके बाद भी वे भ्रष्टाचार के मामले में राष्ट्रपति के साथ हैं। कानूनी एजेंसियों को देखने वालामंत्री ऐसा कर रहा है। वहीं, सत्तारूढ़ पार्टी के सांसदों ने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर देश की सरकार गिराने की कोशिश हो रही है।
नेतन्याहू ने 7 मई को चौथी बार प्रधानमंत्री बने थे
इजराइल में एक साल में हुए तीन चुनाव के बाद बेंजामिन नेतन्याहू ने 7 मई को गठबंधन सरकार में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही देश में 500 दिनों से जारी राजनीतिक संकट खत्म हो गया। पूर्व सेना प्रमुख बेनी गांत्ज और नेतन्याहू 18-18 महीने के लिए प्रधानमंत्री रहेंगे। नेतन्याहू पहले 14 मई को शपथ लेने वाले थे। लेकिन, उनकी पार्टी के कुछ सांसद मंत्रिमंडल में मिलने वाले मंत्रालयों से संतुष्ट नहीं थे। इसी वजह से 14 मई को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह टल गया था।
चुनाव में नेतन्याहू को जीत नहीं मिली थी
मार्च में हुए संसदीय चुनाव में नेतन्याहू तीन सीटों पर बहुमत हासिल करने से चूक गए थे। दूसरी तरफ देश की दो प्रमुख पार्टियों को गठबंधन सरकार बनाने के लिए पर्याप्त वोट नहीं मिले थे। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 36 सीटें और उसकी (लिकुड पार्टी) अगुआई वाले राइट विंग को 58 सीटें मिली थीं।
पूर्व सेना प्रमुख बेनी गांत्ज की ब्लू एंड व्हाइट पार्टी को 33 सीटें और उसकी (ब्लू एंड व्हाइट) अगुआई वाले वामपंथी गुट को 55 सीटें मिली थीं। 120 सीट वाली इजराइल की संसद में बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है। इसके बाद भी दोनों गठबंधन सरकार बनाने के प्रयास में जुटे थे।
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