Friday, December 13, 2019

प्रिंस को मनाने एक दिन की यात्रा पर सऊदी पहुंचे इमरान, 7 महीने में रियाद की यह उनकी चौथी यात्रा December 13, 2019 at 09:21PM

रियाद. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान शनिवार को एक दिन की यात्रा पर सऊदी अरब पहुंचे। इस दौरान वो सऊदी प्रिंस सलमान बिन अब्दुलअजीज से मुलाकात करेंगे। एक लिहाज से यह यात्रा बेहद अहम है। दरअसल, 18 से 20 दिसंबर तक मलेशिया में एक सम्मेलन होने वाला है। इसमें पाकिस्तान, मलेशिया, तुर्की और ईरान के राष्ट्राध्यक्ष हिस्सा लेंगे। सऊदी अरब और यूएई इसे आर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) के लिए चुनौती मानता है। इमरान प्रिंस सलमान की नाराजगी दूर करने की कोशिश करेंगे। इमरान मई से दिसंबर मध्य तक चार बार सऊदी अरब की यात्रा कर चुके हैं।

सऊदी के प्रभुत्व को चुनौती
ओआईसी मुस्लिम देशों का सबसे मजबूत संगठन है। कश्मीर मुद्दे पर इसने पाकिस्तान के रुख का समर्थन न करते हुए भारत का पक्ष लिया। अगस्त में यूएन महासभा में मलेशिया और तुर्की ने ही पाकिस्तान का समर्थन किया। इसी दौरान पाकिस्तान, मलेशिया और तुर्की ने मलेशिया की राजधानी कुआलालम्पुर में 18 से 20 दिसंबर तक एक सम्मेलन आयोजित करने का फैसला किया। बाद में कतर भी इसमें शामिल होने तैयार हो गया। सऊदी और यूएई दोनों को लगता है कि इमरान मलेशिया के पीएम महातिर मोहम्मद और तुर्की के राष्ट्रपति एर्डोगन के साथ मिलकर ओआईसी के समांतर संगठन खड़ा करना चाहते हैं। यह दोनों देशों को सीधी चुनौती लगी।

घबराया पाकिस्तान
सऊदी और यूएई दोनों ने कुआलालम्पुर समिट पर सख्त नाखुशी जाहिर की। पाकिस्तान को इस प्रतिक्रिया का अंदाजा नहीं था। घबराए इमरान ने पहले विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को रियाद भेजा। ‘द डॉन’ के मुताबिक, कुरैशी सऊदी प्रिंस और प्रशासन को मनाने में कामयाब नहीं रहे तो इमरान को खुद वहां जाने का फैसला करना पड़ा। अमेरिका भी सऊदी और यूएई के साथ है। पाकिस्तान की दिक्कत ये है कि वो अब मलेशिया समिट से पीछे भी नहीं हट सकता। और अगर वो आगे बढ़ता है तो सऊदी-यूएई समेत दूसरे मुस्लिम देश उससे दूर हो सकते हैं। यह हर लिहाज से उसके लिए घाटे का सौदा होगा। अब इमरान की यात्रा के बाद ही इस मुद्दे पर तस्वीर साफ हो सकेगी।



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इमरान खान मई के आखिरी हफ्ते से दिसंबर मध्य तक चार बार सऊदी अरब की यात्रा कर चुके हैं। (फाइल)

China tightens up on info after Xinjiang leaks December 13, 2019 at 08:31PM

Top officials deliberated how to respond to the leaks in meetings at the Chinese Communist Party's regional headquarters in Urumqi, Xinjiang's capital, some of the people said. They spoke on condition of anonymity because of fears of retribution against themselves, family members and the government workers.

Sudan's Bashir awaits his fate in corruption trial December 13, 2019 at 08:03PM

A verdict in the corruption trial of Sudan's ex-President Omar al-Bashir is expected on Saturday, eight months after the military deposed the strongman during unprecedented mass protests against his three-decade rule. Bashir is charged with illegally acquiring and using foreign funds.

रक्षा मंत्री एस्पर ने कहा- चीन के बढ़ते खतरे की वजह से हमारे और भारत के कूटनीतिक हित एक जैसे December 13, 2019 at 06:41PM

वॉशिंगटन. अमेरिका ने कहा है कि एशिया और पूरी दुनिया में चीन के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत और उसके कूटनीतिक हित काफी हद तक एक जैसे हो गए हैं। रक्षा मंत्री माइक एस्पर ने कहा कि हम दोनों देश खुला और आजाद हिंद-प्रशांत क्षेत्र चाहते हैं। हमारे इस प्रयास को जितना दबाने की कोशिश की जा रही है, यह उतना ही मजबूती से उभर रहा है। एस्पर ने कहा कि हम ऐसे समय में आ चुके हैं, जब ताकत को लेकर देशों के बीच बड़े मुकाबला चल रहे हैं।

एस्पर ने काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन संस्था के कार्यक्रम में कहा, “अगले हफ्ते हम वॉशिंगटन में भारत के रक्षा-विदेश मंत्रियों की 2+2 समिट की मेजबानी करेंगे। यहां हम दोनों देशों के नेता अपनी बढ़ती साझेदारी पर बात करेंगे, क्योंकि हमारे कूटनीतिक हित काफी मिलते हैं।”

‘चीन का छिपा मकसद अपनी सेना का प्रभाव बढ़ाना’
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा, “चीन ने अपने वन बेल्ट वन रोड कार्यक्रम के जरिए एशिया, यूरोप और अफ्रीका में आर्थिक संबंधों को विस्तार किया है। लेकिन उसका असली मकसद इन जगहों पर चीनी सेना (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) का प्रभाव और पहुंच बढ़ाना है। यह मकसद अब तक उजागर नहीं हुआ है।”

एस्पर ने आरोप लगाया कि चीन बेशर्मी के साथ छोटे देशों को दबा रहा है और अपनी अवैध नौसैन्य गतिविधियों से पड़ोसी देशों की स्वायत्ता लिए खतरा बन रहा है। इससे टकराव की स्थितियां पैदा हो रही हैं। यह अमेरिका के नजरिए के बिल्कुल विपरीत है। हमने हमेशा सभी देशों के लिए मौकों का सम्मान किया है। हम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती साझेदारी पर विश्वास करते हैं और चीन के जवाब में खुद को साबित करने में जुटे हैं।

18 दिसंबर को रक्षा-विदेश मंत्रियों की 2+2 बैठक
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर 18 दिसंबर को वॉशिंगटन में अमेरिकी रक्षा मंत्री माइक एस्पर और विदेश मंत्री माइक पोम्पियो के साथ बैठक करेगंे। इससे पहले एस्पर और राजनाथ के बीच पेंटागन में रक्षा मामलों पर बातचीत होगी। माना जा रहा है कि दोनों नेता हथियारों को लेकर कुछ समझौते कर सकते हैं।



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राजनाथ सिंह अमेरिकी रक्षा मंत्री माइक एस्पर के साथ पेंटागन में भी बैठक करेंगे।