Tuesday, December 10, 2019
Five killed in jihadist attack on Somali hotel December 11, 2019 at 12:04PM
अमेरिका के व्यक्ति ने 91 साल की उम्र में डिप्लोमा लिया, परिवार की वजह से छोड़ दी थी पढ़ाई December 11, 2019 at 11:29AM
न्यूयॉर्क. क्लिफर्ड हैन्सन ने 91 की उम्र में अपनी पढ़ाई की। उन्हें सोमवार को हाई स्कूल डिप्लोमा दिया गया। हैन्सन ने 1930 में परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से बीच में पढ़ाई छोड़ दी थी। डिप्लोमा लेने के बाद हैन्सन ने कहा कि उन्हें आज खुद पर गर्व हो रहा है। हैन्सन फिलहाल लेक रिज केयर सेंटर में रहते हैं।
हैन्सन ने बताया कि 1930 में मेरे पिता काफी बीमार हो गए थे। मुझे पढ़ाई और घर की पारंपरिक खेती में से एक चुनने को कहा गया। उस वक्त घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। मैंने खेती को चुना। उन्होंने बताया कि जब आप खेती करते हैं तो अपना 98% वक्त देना होता है। ऐसे में आप इसके साथ-साथ कोई दूसरा काम नहीं कर सकते। इसलिए मैं कभी पढ़ाई करने की नहीं सोच पाया। मुझे आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी।
मैंने खूब मेहनत की
क्लिफर्ड हैन्सन ने बताया कि डिप्लोमा पूरा करने के लिए मुझे काफी मेहनत करनी पड़ी। मैंने दिन के साथ-साथ परीक्षा के वक्त नाइट में भी पढ़ाई करनी पड़ी। लेक रिज केयर सेंटर की तिमारा परेरा ने बताया सपना पूरा करने की कोई उम्र नहीं होती है। क्लिफर्ड हैन्सन इसका उदाहरण है।
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भारतीय मूल के अभिजीत बनर्जी पारंपरिक धोती-कुर्ता पहनकर नोबेल पुरस्कार लेने पहुंचे December 11, 2019 at 09:34AM
स्टॉकहोम (स्वीडन). भारतीय मूल के अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी (58) और पत्नी एस्थर डुफ्लो (47) मंगलवार को हुए नोबल पुरस्कार वितरण समारोह में पारंपरिक भारतीय परिधानों में पहुंचे। बनर्जी ने कुर्ते के साथ सुनहरे बॉर्डर वाली सफेद धोती और काले रंग का बंद गले का कोट पहना था। डुफ्लो हरे रंग की साड़ी में थीं। उन्होंने ब्लाउज से मैच करती लाल रंग की बिंदी लगा रखी थी। अर्थशास्त्र का नोबेल इस साल बनर्जी, डुफ्लो और माइकल क्रेमर (54) को संयुक्त रूप से मिला है। अक्टूबर में इन पुरस्कारों की घोषणा हुई थी।
'बनर्जी, डुफ्लो, क्रेमर के प्रयोगों सेडेवलपमेंट इकोनॉमिक्स पूरी तरह बदला'
बनर्जी और डुफ्लो मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में प्रोफेसर हैं। क्रेमर भी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं। दुनियाभर में गरीबी कम करने के प्रयासों के लिए इन्हें नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया। नोबेल प्राइज कमेटी का कहना है कि बीते दो दशक में ही बनर्जी, डुफ्लो और क्रेमर के नए प्रयोगात्मक दृष्टिकोण से डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स पूरी तरह बदल गया।
अभिजीत बनर्जी 21 फरवरी 1961 में मुंबई में जन्मे थे, लेकिन कलकत्ता में पले-बढ़े। हायर एजुकेशन यूनिवर्सिटी ऑफ कलकत्ता और जेएनयू से हुई। 1988 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी की थी। अभिजीत की पहली शादी एमआईटी की प्रोफेसर डॉ. अरुंधति बनर्जी से हुई थी, लेकिन 1991 में तलाक हो गया था।
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सबसे युवा पीएम मारिन ने 15 साल की उम्र में नौकरी की; कॉलेज में दाखिले के लिए लोन नहीं लिया, क्योंकि चुकाने का भरोसा नहीं था December 11, 2019 at 09:15AM
हेलसिंकी. फिनलैंड की सना मारिन दुनिया की सबसे युवा राष्ट्राध्यक्ष बन गई हैं। महज 34 साल की उम्र में उन्हें प्रधानमंत्री चुना गया। मारिन 22 साल की उम्र में राजनीति में आईं। इन 12 सालों में उन्होंने पहले चुनाव में हार से लेकर देश के सर्वोच्च पद तक का सफर तय किया है। हालांकि, यह इतना आसान नहीं था। मारिन के मुताबिक उनका बचपन मुश्किलों से भरा रहा। वे समलैंगिक (लेस्बियन) अभिभावकों की इकलौती संतान हैं। बचपन में ही उनकी मांओं का अलगाव हो गया और यहीं से तकलीफों की शुरुआत हुई।
खुद तकलीफ उठाई, इसलिए युवाओं की फिक्रमंद
मांओं के अलगाव के बाद मारिन हेलसिंकी से पर्कला शहर आ गईं। उन्हें जेब खर्च और पढ़ाई के लिए नौकरी करनी पड़ी। मारिन ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि उन्होंने पहली नौकरी 15 साल की उम्र में टैम्पीर शहर की एक बेकरी कंपनी में की। हाईस्कूल में पहुंचीं तो मैगजीन भी बांटीं। ग्रैजुएशन के बाद कुछ साल दुकानों में बतौर कैशियर काम किया। टैम्पीर यूनिवर्सिटी में एडमिनिस्ट्रेटिव साइंस की पढ़ाई के दौरान उन्होंने सिटी यूथ ऑफिस में और सेल्समैन के तौर पर भी काम किया।
मारिन मानती हैं कि बेरोजगार युवाओं को हमेशा कोई अस्थायी काम मिलना चाहिए। इससे युवाओं का समाज और खुद पर भरोसा बढ़ता है। उन्होंने कभी अपने लिए स्टूडेंट लोन नहीं लिया, क्योंकि उन्हें इस बात का भरोसा नहीं था कि वो इसे चुका पाएंगी।
मारिन हफ्ते में 4 दिन, कुल 24 घंटे काम की समर्थक
मारिन ने इस साल सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के 120 साल पूरे होने पर परिवहन और संचार मंत्री के तौर पर पैनल डिस्कशन में हिस्सा लिया। इसमें उन्होंने कहा था, “हफ्ते में चार दिन और हर दिन छह घंटे काम होना चाहिए। यही दुनिया में अगला ट्रेंड होगा।” मारिन ने अपनी पार्टी से हफ्ते में कम दिन काम के प्रस्ताव को लागू करने के लिए कहा था। उनका पक्ष था कि हर दिन आठ घंटे काम की बजाय परिवार के साथ अधिक समय बिताना जरूरी है। इसके अलावा लोगों को अपनी रुचि की चीजों को बेहतर करने पर भी ध्यान देना चाहिए। मारिन के मुताबिक, पढ़ाई में उनकी सफलता ठीक-ठाक ही थी। लेकिन स्कूल के बाहर डांस, खेल और कुत्तों को टहलाना उनका पसंदीदा काम था। उनके काम के दिन कम करने का प्रस्ताव विपक्ष ने ठुकरा दिया था। फिनलैंड में फिलहाल हफ्ते में पांच दिन और हर दिन आठ घंटे काम का नियम है।
फिनलैंड में अब सरकार की कमान 5 महिलाओं के हाथ
फिनलैंड में किसी महिला का प्रधानमंत्री बनना नया नहीं है। हालांकि, कम उम्र में लोगों का राजनीति में आने का ट्रेंड मारिन के साथ ही शुरू हुआ है। मारिन के नेतृत्व में सरकार गठन के लिए चार अन्य दलाें का एक सेंटर-लेफ्ट गठबंधन बनाया गया है। इसकी कमान भी महिलाओं के हाथ में हैं। यानी, फिनलैंड में सरकार का नेतृत्व करने वाली पांच महिलाएं होंगी। इनमें से चार (सना मारिन, ली एंडरसन, कत्री कुलमुनी और मारिया ओहिसालो) की औसत उम्र 33 साल है।

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