पाकिस्तान की वायुसेना इन दिनों एक वॉर गेम में हिस्सा ले रही है। इसका कोड नेम हाई मार्क है। भारतीय वायुसेना इस पर पैनी नजर रख रही है। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस वॉर गेम का मकसद फरवरी 2019 में हुई बालाकोट जैसीएयर स्ट्राइक से निपटना है। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक कर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ट्रेनिंग कैम्प को तबाह कर दिया था।
न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान एयरफोर्स (पीएएफ) के इस वॉर गेम में उसके सभी फाइटर जेट हिस्सा ले रहे हैं। इनमें जेएफ-17, एफ-16 और मिराज 3 शामिल हैं। पीएएफ ने अभ्यास की जानकारी, वहां की एविएशन मिनिस्ट्री को भी दी है।
रात में उड़ान भर रहे पाकिस्तानी फाइटर जेट
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी एयरफोर्स रात में उड़ान भरने का अभ्यास कर रही है। मंगलवार रात कराची के आसमान पर पाकिस्तानी एयरफोर्स के लड़ाकू विमान दिखाई दे रहे थे। पिछले हफ्ते भी पाकिस्तान ने ऐसी ही एक एयरफोर्स ड्रिल की थी। तब हंदवाड़ा के एक एनकाउंटर में भारतीय सेना के एक कर्नल शहीद हो गए थे। पाकिस्तान को डर था कि भारतीय वायुसेना फिर कोई एयर स्ट्राइक कर सकती है।
पुलवामा हमले के बाद भारत नेएयर स्ट्राइक की थी
वायुसेना ने12 फरवरी 2019 को हुएपुलवामा हमले के बाद 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी। अगले दिन 27 फरवरी को पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई की कोशिशों को वायुसेना ने विफल कर दिया था। पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए थे। हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश ने ली थी। इसके 12 दिन बाद वायुसेना ने एयर स्ट्राइक की थी।
मिनेपोलिस शहर में पिछले हफ्ते 46 साल के अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद अमेरिका के इतिहास के सबसे बड़े प्रदर्शन हुए। इस घटना से जनता में आक्रोश की सीमाएं टूट गईं। पूरे देश के 40 से भी अधिक शहरों में हिंसक प्रदर्शन हुए। मंगलवार को ह्यूस्टन में फ्लॉयड को दफनाया गया।
इन सबके बीच यह सवाल उठताहै कि क्या फ्लॉयड वास्तव में इस सम्मान के काबिल था? जॉर्ज कई अपराध में शामिल होने के कारण 7 बार जेल जा चुका था। इसे नहीं भूलना चाहिए। हालांकि, उसकी मौत सामान्य नहीं थी, लेकिनयह भी सच हैउसकी मौत के बाद हुए प्रदर्शनों मेंकई लोगों को नुकसान सहना पड़ा, इसे कैसे भुलाया जा सकता है। उसे हीरो बनाकर राजनीति की जा रही है।
मीडिया जैसा बता रहा, वैसी स्थिति नहीं
मीडिया जितना बता रहा है, यहां उतनी रंगभेद की स्थिति नहीं है। यदि ऐसा होता तो अफ्रीकन-अमेरिकन के साथ दूसरे देशों के लोग यहां प्रेम, सम्मान के साथ नौकरियों में ऊंचे पदों पर न बैठे होते। इस देश की कई होमलेस सुविधाओं का सबसे अधिक लाभ भी यही लोग उठा रहे हैं।फ्लॉयड की मौत के बाद हुए प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले कई युवा ऐसे हैं, जो ड्रग्स, चोरी जैसे अपराधों में शामिल हैं। आंदोलन में इनके शामिल होने से जनता को भी बहुत नुकसान उठाना पड़ा।
अंतिम संस्कार में निकली रैलियां
फ्लॉयड के अंतिम संस्कार पर मिनेपोलिस, ह्यूस्टन, न्यूयॉर्क, लॉस एंजिल्स, फिलाडेल्फिया, अटलांटा और सिएटल में भी कई रैलियां निकाली गईं। रैली में लाखों लोगों ने हिस्सा लिया। इसमें ह्यूस्टन की रैली में 60 हजार लोग शामिल हुए। न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन में ब्रिज बंद कर दिया गया। कुछ ऐसा ही नजारा अमेरिका के अन्य शहरों में भी दिखाई दिया।
8 मिनट 46 सेकंड का मौन रखा गया
ह्यूस्टन में फ्लॉयड को मंगलवार दोपहर दफनाया गया। इस दौरान 8 मिनट और 46 सेकंड का मौन धारण किया गया, क्योंकि इतनी ही देर पुलिस ने घुटने से फ्लॉयड की गर्दन दबाए रखी थी। दम घुटने से उसकी मौत हो गई थी। इसके साथ ही मिनेसोटा राज्य के मिनेपोलिस में फ्लॉयड का एक स्मारक भी बनाया जाएगा।
यह फोटो 9 जून 2020 की है। न्यूयॉर्क में एक प्रदर्शनकारी फ्लॉयड की फोटो के साथ प्रदर्शन कर रही है। फ्लायड को ह्यूस्टन में दफनाया गया है।
आंदोलन सामान्य जनता का आक्रोश
अफ्रीकन-अमेरिकन, श्वेत, लैटिन, एशियन और मूल अमेरिकन सभी फ्लॉयड की मौत के बाद शुरू हुए आंदोलन में शामिल हुए हैं। यह प्रदर्शन केवल एक अफ्रीकन-अमेरिकन की मौत के लिए नहीं हुए। सही मायने में यह आंदोलन अब तक दबेहुए आम आदमी का आक्रोश है। अमेरिका जैसेआजादी वाले देश में न्याय की गुहार लगाने की गुजारिश है। कई लोग अपने आप को हमेशा से व्हाइट अमेरिकन से नीचा मानकर अपनी भावनाओं को दबाते रहे हैं। आखिर ऐसे समय में उनका आक्रोश इस तरह से बाहर आया और आंदोलन का हिस्सा बना। फ्लॉयड की मौत अमेरिका के इतिहास की सबसे बड़ी नागरिक अशांति मानी गई है।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे आंदोलन
अमेरिका में पहले भी ऐसे आंदोलन हो चुके हैं। ऐसे आंदोलन इतिहास बनाते हैं। 1955 में एक अश्वेत महिला रोजा मोंटगोमेरी अल्बामा स्टेट में बस में श्वेतोंकी विशेष सीट पर बैठ गई थी। सीट खाली करने को कहा गया तो उन्होंने इनकार करते हुए विरोध कर दिया। रोजा पर केस दर्ज हुआ। उन्होंने इसके लिए लड़ाई लड़ी। आखिर 1956 में उन्हें अपना हक मिला। अमेरिकन सिविल राइट्स की लड़ाई में भी उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई। अमेरिका की संसद ने उन्हें ‘मदर ऑफ फ्रीडम मूवमेंट ’ नाम दिया।
आखिर में 1960 में मार्टिन लूथर किंग की लड़ाई के बाद अश्वेतों को कई हक मिलने लगे। इसमें भी अमेरिकन सिविल राइट्स मूवमेंट की यह महत्वपूर्ण भूमिका थी। इसके बाद वे राष्ट्रीय हीरो बन गए।
भारत में रंग नहीं, लेकिन जाति के आधार पर हुआ विभाजन
हमारे देश में भी एक ही तरह के रंग-रूप और बोली वाले लोगों के बीच ब्राह्मण, वैश्य, क्षत्रिय, शूद्र जैसे चार वर्ण हैं। सब इन्हीं में बंटे हुए हैं। इससे एक जैसे दिखने होने के बाद भी अलगाव का बीज रोपा गया। उन दिनों में अगर निचले तबके का कोई आदमी ऊंची जाति के लोगों के सामने से गुजरता, तो उसे अपने सिर पर चप्पल रखकर गुजरना पड़ता। सवर्णों के अलावा अन्य लोगों को गांव के कुओं से पानी लेने की भी मनाही थी। इस जातीयभेदभाव ने हजारों सालसे इंसान को इंसान से अलग करने में बड़ीभूमिका निभाई है। भारत में, किसी व्यक्ति के उपनाम से तय होता है कि वह किस समुदाय से है।
अमेरिका में कम हो रहा रंगभेद
अमेरिका में उपनामों के आधार पर लोगों में छोटे-बड़े जैसी कोई बात नहीं है। यहां पर रंग और किस देश के मूल निवासी हैं, इस आधार पर भेदभाव किया जाता रहा है। तमाम देशों से लाखों लोग अमेरिका आए हैं और यहां के निवासी बने हैं। अंतर्विवाह के कारण यहां मिश्रित लोगों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई, जिसके चलते यहां रंगभेद कम हो रहा है। यहां रंगभेद नहीं, उनके व्यवहार के कारण भेदभाव किया जाता है। इसके अलावा अमेरिका का पहला और अंतिम नियम है कि चाहे कोई भी वजह हो इंसानियत को नहीं छोड़ा जाएगा।
(रेखा ने कई किताबें लिखी हैं। पिछले 20 सालों से वे कई मैगजीन और न्यूज पेपर से जुड़ी हुई हैं।)
पाकिस्तान में मंगलवार रात सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि भारतीय वायुसेना के जेट फाइटर्स कराची और बहावलपुर के करीब उड़ान भर रहे हैं। कुछ लोग दहशत में आ गए। दावा तो यहां तक था कि कराची में भारत के हमले के डर से ब्लैकआउट कर दिया गया है। यह अफवाहें बुधवार सुबह तक चलती रहीं। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, भारतीय वायुसेना ने ऐसी किसी भी घटना से इनकार कर दिया है।
सच्चाई बताइए
पाकिस्तान में एनबीसी के पूर्व रिपोर्टर वाज खान ने ट्विटर पर लिखा, ‘प्रिय, भारत और पाकिस्तान। अफवाहें हैं कि भारतीय वायुसेना ने पीओके और सिंध-राजस्थान सेक्टर में घुसपैठ की है। दोनों देशों को मामले की जानकारी देना चाहिए। मेरी गुजारिश है कि शांत रहें और इस हफ्ते का मजा लें।’
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जेट फाइटर्स देख भी लिए
कराची के एक यूजर को तो भारत के जेट फाइटर्स नजर भी आ गए। लराइब मोहिब ने कहा- मैंने खुद जेट फाइटर्स को उड़ान भरते देखा। ये हो क्या रहा है। आयशा जफर ने लिखा- कराची के करीब शायद काफी जेट फाइटर्स उड़ान भर रहे हैं। आयशा भी कराची में ही रहती हैं। एक यूजर के मुताबिक, भारत ने नहीं बल्कि पाकिस्तान एयरफोर्स ने राजस्थान बॉर्डर पर घुसपैठ की कोशिश की है। भारतीय वायुसेना एक्शन में आई तो पाकिस्तान के जेट फाइटर्स दुम दबाकर लौट गए।
ट्विटर का एक स्क्रीन शॉट। इसमें भी भारतीय लड़ाकू विमानों के पाकिस्तान के करीब उड़ने की बात कही गई।
विंग कमांडर अभिनंदन का भी जिक्र हुआ
कुछ यूजर्स ऐसे भी थे जिन्होंने मंगलवार रात की कथित घटना को विंग कमांडर अभिनंदन से जोड़ दिया। फरवरी में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। इसके पहले हुई झड़प में विंग कमांडर अभिनंदन का एमआईजी-21 पाकिस्तान में क्रैश हुआ था। अभिनंदन को बंदी बना लिया गया था। बाद में पाकिस्तान उन्हें छोड़ने पर मजबूर हुआ। कराची के एक यूजर ने कहा कि पाकिस्तानी एयरफोर्स भारत को सरप्राइज दे सकती है।
"Now, if racism is something that exists everywhere, racism also exists within the United Nations... We have very robust policies in relation to discrimination, harassment, abuse of authority... But we have not paid enough attention within the organisation to the specific question of racist bias and racist discrimination," Guterres said during the meeting.