Friday, June 5, 2020

जॉर्ज की हत्या का विरोध कर रहे 75 साल के बुजुर्ग का पुलिस के धक्के से सिर फटा, हालत गंभीर; तेज हुए विरोध प्रदर्शन June 04, 2020 at 10:03PM

जॉर्ज फ्लायड की मौत के बाद हो रहे प्रदर्शनों के बीच एक बार फिर पुलिस की बर्बरता सामने आई है। न्यूयॉर्क के बफैलो शहर में पुलिस ने एक 75 साल के बुजुर्ग को धक्का दे दिया। इस दौरान वह जमीन पर गिरा और सिर पर गंभीर चोट आई।इस मामले मेंदो पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इस घटना के सामने आने के बाद फिर से कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन बढ़ गए हैं।

बुजुर्ग गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती

इस घटना का एक रिपोर्टर ने वीडियो बनाकर सोशल मिडिया पर डाला है। इसमें नजर आ रहा है कि प्रदर्शन के दौरान एक सफेद बालों वाला बुजुर्ग पुलिस की लाइन में कुछ कहने के लिए आता है। इस दौरान उस पर चीखते हुए एक पुलिसकर्मी अपने डंडे और दूसरा पुलिसकर्मीहाथ से धक्ता देता है। बुजुर्ग सिर के बल जमीन पर गिरता है और सिर फटने की आवाज सुनाई देती है। उसके सिर से खून बहने लगता है। बुजुर्ग श्वेत था, लेकिन अभी तक उसकी पहचान नहीं हो सकी है।इसके बाद बुजुर्ग को हॉस्पिटल ले जाया जाता है। पुलिस ने बाद में जानकारी दी कि बुजुर्ग की हालत गंभीर है। उसे इरी काउंटी मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया है। बफैलो पुलिस कमिश्नर बायरन लॉकवुड ने जांच के आदेश दिए हैं और धक्का देने वाले दोनों पुलिस कर्मियोंको निलंबित कर दिया है।

मेयर ने कहा- बहुत परेशान हूं
बफैलो के मेयर बायरन ब्राउन ने कहा, ‘‘वीडियो देखकर मैं बहुत ज्यादा परेशान हूं। यहां कई दिनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहा है। मेरी पुलिस अधिकारियों और समुदाय के लोगों के साथ कई बैठके हो चुकी हैं। इसके बावजूद यह घटना होना निराशाजनक है।’’ यह वीडियो वायरल होने पर चारो ओर पुलिस की बर्बरता की निंदा हो रही है। इसके साथ ही कई शहरों फिर से प्रदर्शनकारी सड़कों पर आ गए हैं।

25 मई को फ्लॉयड को गिरफ्तार किया गया था
मिनेपोलिस में 25 मई को फ्लॉयड को पुलिस ने धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया था।पुलिस अफसर डेरेक चॉविन नेफ्लॉयड को सड़क पर दबोचा था और अपने घुटने से उसकी गर्दन को करीब आठ मिनट तक दबाए रखा था। फ्लॉयड के हाथों में हथकड़ी थी।इसमें 46 साल का जॉर्ज लगातार पुलिस अफसर से घुटना हटाने की गुहार लगाता रहा।

वीडियो में उसने कहा, 'आपका घुटना मेरे गर्दन पर है। मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं...।’’ धीरे-धीरे उसकी हरकत बंद हो जाती है। इसके बाद अफसर कहते हैं, ‘उठो और कार में बैठो’, तब उसकी कोई प्रतिक्रिया नहीं आती। इस दौरान आस-पास काफी भीड़ जमा हुई। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।



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न्यूयॉर्क के बफैलो में बुजुर्ग को धक्का देने के बाद उठाने की कोशिश करते पुलिसकर्मी। इस घटना ने विरोध-प्रदर्शनों को और तेज कर दिया है।

जॉर्ज फ्लॉयड की मौत पर प्रदर्शन: जिनका स्टोर्स लूटा गया, वे कहते हैं- 11 साल यहां रहते हो गया, पहली बार ऐसी अराजकता देखी June 04, 2020 at 09:55PM

अंबरिश ठाकर मूल रूप से गुजरात केअमरेली जिले के राजुला के हैं। 2009 से वे शिकागो में निवास कर रहे हैं। शिकागो और आसपास के इलाकों में मोटेल, लिकर-ग्रोसरी और हेल्थ-वेलनेस स्टोर्स चलाते हैं। अमेरिका में फैली हिंसा के दौरान उनके स्टोर्स में भी लूट और तोड़फोड़ की गई। हिंसा के बारे में उन्होंने आपबीती बताई।

अंबरिश बताते हैं कि शिकागो के अलावा अन्य राज्यों में 28 मई को शुरू हुए दंगों को लेकर हम सभी चिंतित थे। हमारा मानना था कि उपनगरों में ऐसा नहीं हो सकता। इसलिए शनिवार को हमने बाजार खोला। हमें लगातार चेतावनी भी दी जाती रही। कोरोना की विपत्ति में फंसे और डरे-सहमे गुजरातियों या अन्य भारतीयों को मैं मुफ्त में अपने मोटल में रहने की अनुमति देता हूं।

सड़क पर उतर आई हिंसक भीड़
शनिवार दोपहर को उपनगरों में तनाव बढ़ गया, बड़ी संख्या में अश्वेतदंगाइयों की भीड़ सड़क पर उतर गई। किसी को न कानून की परवाह थी और न ही पुलिस की। हिंदी फिल्म एयरलिफ्ट जैसे दृश्य सड़क पर दिखाई दे रहे थे। स्थिति ऐसी थी कि हम दुकान बंद नहीं कर सकते थे। क्योंकि बंद करके दुकान के अंदर दुबक जाना और भी खतरनाकथा।

भीड़ में अश्वेत ही नहीं गोरे भी थे
हमें क्या करना चाहिए, अभी हम इस पर विचार कर ही रहे थे कि करीब 500 लोगों की भीड़ हमारे स्टोर्स के इलाके में घुसने लगी। भीड़ में बड़ी संख्या में अश्वेतों के साथ-साथ कुछ गोरे भी शामिल थे। इनकी आंखों में केवल लूटपाट ही नहीं, बल्कि बदला लेने का आक्रोश साफ दिखाई दे रहा था। उनका हिंसक व्यवहार भी हालात की सूचना दे रहा था।

दंगाई लूट की पूरी तैयारी से आए थे
ये दंगे पूरी योजना बनाकर किए गए। दंगाईहथौड़े, मेटल कटर, पाइप के अलावा ऑटोमैटथ्कगन लेकर खुले आम बेखौफ घूम रहे थे। मुझे अमेरिका में 11 साल हो गए, लेकिन ऐसी अराजकता और हिंसक स्थिति मैंने पहले कभी नहीं देखी। मेरे स्टोर के आसपास के स्टोर्स, शॉपिंग काम्पलेक्स में तोड़फोड़ शुरू हुई, तभी मैं समझ गया कि अब हमारी बारी है। यदि हम इसका विरोध करते, तो हालात और भी बुरे हो जाते। पुलिस नहीं आ रही थी, तब हम अपनी बारी का इंतजार करते हुए अपने स्टोर्स में ही बैठे रहे।

हमारे स्टोर्स में की गई लूटपाट-तोड़फोड़
आखिर हमारी बारी आ ही गई। बड़ी संख्या में उपद्रवियों ने हमारे स्टोर्स में प्रवेश किया, अंदर आते ही हथौड़े से जहां पाए, वहां प्रहार करने लगे। कांच तोड़ दिया, शो-केस का सामान फर्श पर गिरा दिया। फर्नीचर तोड़ डाला। यहां तक की हथौड़े मारकर दीवार को भी नुकसान पहुंचाया। बाद में तिजोरी में रखा कैश लूट लिया।

आंखों के सामने होती रही लूटपाट
मेरे दोस्त नयन पटेल के स्टोर के भी यही हाल थे। उसके स्टोर पर 2000 लोगों ने धावा बोला। उसकी आंखों के सामने ही 3-4 घंटे तक बिना किसी डर के लूटपाट की। स्टोर पूरी तहस-नहस कर दी। एक भी चीज ऐसी नहीं बची, जिसका इस्तेमाल किया जा सके। लुटेरों ने उन्हें दुकान दोबारा खोलने पर जान से मारने की धमकी दी। हम लोगों ने डर के कारण अपने स्टोर्स अभी तक नहीं खोले हैं।

पुलिस का अतापता नहीं
आमतौर पर पुलिस की आपातकालीन सेवा 911 को बेहद भरोसेमंद माना जाता है, लेकिन इन दंगों में वह बिलकुल नाकाम साबित हुई है। 911 पर कई शिकायतें करने के बावजूद पुलिस शायद ही किसी जगह समय पर पहुंची हो। यह भी कहा जाता है कि लोगों की आक्रामकता को कम करने के लिए पुलिस ने जानबूझकर इसे नजरअंदाज किया है।

न जाने हालात कब सुधरेंगे
डर का माहौल बना हुआ है। स्टोर्स की सुरक्षा के लिए हमने काफी कुछ किया है, लेकिन हमें मालूम है, जब तक पुलिस सक्रिय नहीं होती, तब तक कुछ भी सुरक्षित नहीं है। कोरोना संकट के कारण लोग दो महीने से घरों में कैद हैं। साढ़े 3 करोड़ लोग बेरोजगार हैं। ऐसे में असामाजिक तत्वों को खुला मैदान मिल गया है। हम केवल अच्छे दिनों की राह ही देख सकते हैं कि सरकार कुछ करे, ताकि हालात पर काबू पाया जा सके और हम अपना कारोबार फिर से शुरू कर सकें।



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यह तस्वीर शिकागो की दुकानों में शनिवार को की गई तोड़फोड़ की है। अश्वेत अमेरिकी जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के विरोध में अमेरिका के कई शहरों में प्रदर्शन और दंगे हो रहे हैं। आरोप है कि पुलिस ने फ्लॉयड को हिरासत में लेकर उसकी गर्दन पर पैर रख दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी।

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